पड़ोस वाली भाभी की प्यास
मेरा नाम आर्यन है। उम्र 28 साल, और मैं गांधीनगर के एक आलीशान अपार्टमेंट में अपनी पत्नी के साथ रहता हूँ। मेरी ज़िंदगी में सब कुछ सही था—करियर, घर और मेरी बीवी... लेकिन एक चीज़ थी जो मुझे अंदर ही अंदर जला रही थी। और वो थीं हमारी पड़ोसन, सोनिया भाभी।
सोनिया भाभी... 32 साल की दहकती हुई आग। 38-32-36 का ऐसा कातिलाना फिगर कि कोई भी मर्द उन्हें देख कर अपना आपा खो दे। वो मेरी बीवी की सबसे अच्छी सहेली थीं और अक्सर हमारे घर आती रहती थीं। मेरी बीवी उनसे बहुत खुल कर बातें करती थी और कभी-कभी तो मेरी ही तारीफ करती थी—कि कैसे मैं बिस्तर पर उन्हें पागल कर देता हूँ।
लॉकडाउन के दौरान, जब सब अपने घरों में कैद थे, मुझे एक ऐसी बात पता चली जिसने मेरी शरारत को जुनून में बदल दिया। सोनिया भाभी के पति, रमेश, एक ठंडे इंसान थे। महीने में एक बार शायद वो उन्हें छूते थे, और वो भी बस एक औपचारिकता की तरह। भाभी की आँखों में एक ऐसी प्यास थी जिसे सिर्फ एक भूखा मर्द ही मिटा सकता था।
मैंने तय किया कि अब ये प्यास मैं बुझाऊँगा।
मैंने एक खेल खेला। एक शाम, जब मेरी बीवी घर पर नहीं थी और मुझे पता था कि भाभी आने वाली हैं, मैं जान-बूझकर बाथरूम गया। मैं पूरी तरह नंगा था, मेरा लिंग पूरी तरह तना हुआ और सख्त था। जैसे ही भाभी कमरे में आईं, उनकी नज़र सीधे मुझ पर पड़ी।
वो ठिठक गईं। उनकी नज़रें मेरे सख्त और उभरे हुए लिंग से हट नहीं रही थीं। उनकी सांसें तेज़ हो गईं और उनके चेहरे पर एक अजीब सी चमक आ गई। उन्होंने "सॉरी" बोला और बाहर चली गईं, लेकिन मुझे पता था... बीज बोया जा चुका है। अगले दो दिन तक वो मुझसे ठीक से बात नहीं कर पाईं, लेकिन जब भी वो सामने आतीं, उनकी नज़रें चुपके से मेरे निचले हिस्से को तलाशती रहती थीं।
फिर आया वो दिन। घर खाली था, और सोनिया भाभी फिर से मिलने आईं।
"कैसे हो, आर्यन?" उन्होंने पूछा, उनकी आवाज़ में एक हल्की सी कंपन थी।
"फाइन हूँ भाभी... आप?" मैंने उन्हें अंदर बुलाया, मेरी नज़रें उनके गोल और भरे हुए स्तनों पर थीं जो उनकी टाइट कुर्ती में कैद थे।
मैंने उन्हें पानी का गिलास दिया, और जैसे ही वो पीने लगीं, मैंने "गलती" से थोड़ा पानी उनकी कुर्ती पर गिरा दिया। पानी गिरते ही कुर्ती शरीर से चिपक गई और उनके निप्पल्स साफ दिखने लगे। वो तुरंत बाथरूम की तरफ भागीं, और मैं उनके पीछे-पीछे चला गया।
जैसे ही वो मुड़ीं, मैंने उन्हें दीवार से चिपका दिया और उनके लबों को ज़ोर से चूम लिया।
"ये क्या कर रहे हो आर्यन!" वो चिल्लाईं, लेकिन उनके हाथ मुझे धकेल नहीं रहे थे।
"बस आपकी प्यास बुझा रहा हूँ, भाभी..." मैंने उनके कानों को काटना शुरू किया और उनकी गर्दन पर गरम चुंबन देने लगा।
वो पूरी तरह गरम हो चुकी थीं। "ये गलत है... मैं तुमसे बड़ी हूँ..." उन्होंने सिसकियाँ लेते हुए कहा।
"बड़ी होंगी अपने पति के लिए... मेरे लिए तो आप एक प्यासी रंडी लग रही हैं," मैंने उनके कान में फुसफुसाया और उनके होंठों को इतनी शिद्दत से चूसा कि वो पूरी तरह पिघल गईं।
मैंने उनकी कुर्ती ऊपर उठाई और उनके बड़े, नरम स्तनों को अपने हाथों में भर लिया। वो इतने कोमल थे कि मेरे हाथ उनमें धंस रहे थे। मैंने उनके लहंगे का नाड़ा खोला और वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा-पेंटी में खड़ी थीं।
"कोई देख लेगा तो इज़्ज़त चली जाएगी," वो कह रही थीं, लेकिन उनकी चूत से पानी निकलकर पेंटी को गीला कर चुका था। मैंने अपना हाथ उनकी पेंटी के अंदर डाला और उनकी गीली चूत को रगड़ने लगा।
"तुम तो अभी से झड़ गई भाभी!" मैंने छेड़ते हुए कहा।
"रमेश ने कभी मुझे ऐसे छुआ ही नहीं... वो तो बस 10 मिनट में सो जाता है," उन्होंने तड़पते हुए कहा। "तुम्हारा लिंग दिखाओ... तुम्हारी बीवी ने बहुत तारीफ की है, उसे देखने के लिए मैं तरस रही हूँ!"
मैंने उन्हें बिस्तर पर पटका और उनकी ब्रा और पेंटी उतार कर फेंक दी। उनका बदन धूप की तरह तप रहा था।
"प्लीज़ आर्यन, जल्दी... मुझे तुम्हारा लिंग चाहिए!" वो गिड़गिड़ाईं।
"इतनी जल्दी नहीं, पहले मैं तुम्हारा मज़ा लूँगा," मैंने कहा और उनके दोनों पैर उठाकर उनकी गीली चूत पर अपनी ज़ुबान फेरनी शुरू की।
"ओह्ह! हाँ! ऐसे... पहली बार किसी ने मेरी चूत चाटी है! प्लीज, पूरा रस पी जाओ मेरा!" वो चीखने लगीं। मैंने इतनी शिद्दत से उनके क्लिट को चाटा कि वो झटके खाने लगीं और एक ज़ोरदार ऑर्गेज्म के साथ झड़ गईं। उनका शरीर कांप रहा था।
अब उनकी बारी थी। उन्होंने मुझे धक्का देकर लिटाया और मेरे तने हुए लिंग को अपनी उंगलियों से मसलने लगीं। फिर उन्होंने उसे अपने मुँह में ले लिया। वो इतनी भूख से चूस रही थीं जैसे सदियों से इसका इंतज़ार था।
"तुम्हारी बीवी भी ऐसे नहीं चूसती... कहाँ से सीखा ये सब?" मैंने कराहते हुए पूछा।
"पहली बार कर रही हूँ... रमेश को ये सब पसंद नहीं था," उन्होंने मेरे लिंग को गहराई तक अपने गले में उतारा। 10 मिनट के इंटेंस ब्लो-जॉब के बाद, मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और उनके मुँह में अपना गरम गाढ़ा दूध छोड़ दिया। उन्होंने एक बूंद भी नहीं छोड़ा और पूरा पी गईं।
"मदरचोद... बताना तो चाहिए था कि निकलने वाला है!" उन्होंने हंसते हुए कहा।
वो उठीं और जाने लगीं, "अब मैं जाती हूँ, वरना कोई देख लेगा।"
लेकिन मेरा जुनून अब चरम पर था। मैंने उन्हें पकड़ा और बिस्तर पर पछे-के-पछे (डॉगी स्टाइल) करके पटका और बिना किसी चेतावनी के, अपना पूरा सख्त लिंग एक झटके में उनकी टाइट चूत में उतार दिया।
"आह्ह! माँ! बचाओ! बहुत दर्द हो रहा है!" वो चीखीं। "फाड़ दिया तुमने मेरा... रमेश का लिंग इतना बड़ा नहीं था!"
मैंने उन्हें कस कर पकड़ा और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारना शुरू किया। धीरे-धीरे उनका दर्द मज़े में बदल गया।
"ओह्ह आर्यन... हाँ! छोड़ना मत! बस ऐसे ही चोदते रहो! तुम्हारी बीवी कितनी लकी है... इतना बड़ा लिंग मिला उसे!"
"अब तुम्हें भी मिल गया ना? अब मज़ा लो!" मैंने उन्हें इतनी ज़ोर से चोदा कि वो बार-बार झड़ रही थीं। उन्होंने साफ कह दिया कि अब वो रमेश की नहीं, बल्कि मेरी "रंडी" हैं और मैं जो कहूँगा वो करेंगी।
जब वो थक कर चूर हो गईं, तब हमने कपड़े पहने। जाते वक्त उन्होंने मेरी आँखों में देखा और एक शैतानी मुस्कान के साथ कहा, "अगली बार जब आऊँगी... तैयार रहना।"

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